कैपिटल गेन टैक्स क्या होता है

जब आप कोई संपत्ति — शेयर, म्यूचुअल फंड, ज़मीन या मकान — मुनाफ़े में बेचते हैं, तो उस मुनाफ़े पर लगने वाला टैक्स कैपिटल गेन टैक्स कहलाता है। दर इस बात पर निर्भर करती है कि आपने उसे कितने समय रखा।

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शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म

सूचीबद्ध शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड: 12 महीने से ज़्यादा रखने पर लॉन्ग-टर्म (LTCG) — दर 12.5%, और एक साल में ₹1,25,000 तक का LTCG कर-मुक्त है। 12 महीने से कम रखने पर शॉर्ट-टर्म (STCG) — दर 20%। अचल संपत्ति: 24 महीने से ज़्यादा रखने पर LTCG 12.5% (इंडेक्सेशन के बिना), कम रखने पर मुनाफ़ा आपकी स्लैब दर से टैक्स योग्य। ये दरें 23 जुलाई 2024 के बजट से लागू हैं।

टैक्स कैसे बचाएँ?

इक्विटी में हर साल ₹1.25 लाख की LTCG छूट का इस्तेमाल करें — कुछ यूनिट बेचकर दोबारा खरीदना (tax harvesting) आम तरीका है। घर बेचने पर धारा 54 (नया घर खरीदने पर) और धारा 54EC (54EF बॉन्ड में निवेश, ₹50 लाख तक) से छूट मिल सकती है। कैपिटल लॉस को 8 साल तक आगे ले जाया जा सकता है — लेकिन सिर्फ़ तभी जब आप ITR समय पर भरें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

₹1.25 लाख की छूट कैसे काम करती है?

एक वित्त वर्ष में सूचीबद्ध इक्विटी/इक्विटी फंड से हुए कुल LTCG में से ₹1,25,000 कर-मुक्त है; उससे ऊपर के हिस्से पर 12.5% टैक्स लगता है।

क्या कैपिटल लॉस को सैलरी से घटा सकते हैं?

नहीं। कैपिटल लॉस सिर्फ़ कैपिटल गेन से ही एडजस्ट होता है। लॉन्ग-टर्म लॉस सिर्फ़ लॉन्ग-टर्म गेन से, जबकि शॉर्ट-टर्म लॉस दोनों से एडजस्ट हो सकता है।

प्रॉपर्टी बेचने पर TDS कटता है?

हाँ — ₹50 लाख या उससे ज़्यादा की अचल संपत्ति पर खरीदार को धारा 194-IA के तहत 1% TDS काटकर फॉर्म 26QB से जमा करना होता है।

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यह सामान्य जानकारी है, पेशेवर सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपके तथ्यों पर निर्भर करते हैं — कार्रवाई से पहले किसी लाइसेंस प्राप्त CA या वकील से पुष्टि करें।