ITR देर से भरने पर क्या होता है

आखिरी तारीख निकल जाने पर भी आप बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं — लेकिन इसकी क़ीमत लेट फीस, ब्याज और कुछ अधिकार खोने के रूप में चुकानी पड़ती है।

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लेट फीस और ब्याज

धारा 234F के तहत लेट फीस: ₹5,000, लेकिन अगर कुल आय ₹5 लाख तक है तो सिर्फ़ ₹1,000 (आय मूल छूट सीमा से कम हो तो शून्य)। साथ ही ब्याज: 234A — बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह, नियत तारीख से भरने तक। 234B — अगर अग्रिम कर निर्धारित कर के 90% से कम है, तो 1 अप्रैल से 1% प्रति माह। 234C — किस्त टालने पर 1% प्रति माह। ब्याज पूरे महीने पर लगता है — एक दिन की देरी भी पूरा महीना गिनी जाती है।

सिर्फ़ पैसा नहीं, अधिकार भी जाते हैं

देर से भरने का सबसे बड़ा नुकसान अक्सर फीस नहीं होती — बिलेटेड रिटर्न भरने पर आप बिज़नेस और कैपिटल लॉस को आगे नहीं ले जा सकते (गृह-संपत्ति हानि अपवाद है)। यानी शेयर या बिज़नेस में हुआ नुकसान भविष्य के मुनाफ़े से समायोजित करने का हक़ हमेशा के लिए ख़त्म हो जाता है। इसके अलावा रिफंड देर से मिलता है और उस पर ब्याज भी कम मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ITR कितनी देर तक भर सकते हैं?

बिलेटेड रिटर्न आमतौर पर निर्धारण वर्ष की 31 दिसंबर तक भरा जा सकता है। उसके बाद सिर्फ़ ITR-U (अपडेटेड रिटर्न) का विकल्प बचता है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है।

अगर टैक्स बकाया नहीं है तो भी लेट फीस लगेगी?

हाँ — धारा 234F की लेट फीस देरी पर लगती है, चाहे टैक्स बकाया हो या न हो। हाँ, 234A का ब्याज तभी लगता है जब टैक्स बकाया हो।

क्या देर से भरने पर रिफंड मिलेगा?

मिलेगा, लेकिन देर से — और रिफंड पर मिलने वाला ब्याज भी उस अवधि के लिए कम हो जाता है जितनी देर आपने की।

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यह सामान्य जानकारी है, पेशेवर सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपके तथ्यों पर निर्भर करते हैं — कार्रवाई से पहले किसी लाइसेंस प्राप्त CA या वकील से पुष्टि करें।