प्रोफेशनल टैक्स क्या होता है

सैलरी स्लिप में दिखने वाला 'Professional Tax' कोई केंद्रीय टैक्स नहीं — यह राज्य सरकार का रोज़गार पर लगने वाला छोटा कर है, जिसे नियोक्ता आपकी सैलरी से काटकर जमा करता है।

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कितना लगता है?

संविधान के अनुच्छेद 276 के तहत यह अधिकतम ₹2,500 प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ही हो सकता है — चाहे आपकी सैलरी कितनी भी हो। इस सीमा के भीतर हर राज्य अपने स्लैब तय करता है। महाराष्ट्र: ₹10,000/माह से ऊपर ₹200 (फरवरी में ₹300, ताकि साल का कुल ₹2,500 बने); ₹25,000/माह तक कमाने वाली महिलाएँ मुक्त। कर्नाटक: ₹25,000/माह से ऊपर ही ₹200। पश्चिम बंगाल: ₹110 से ₹200 तक क्रमिक स्लैब। तेलंगाना/आंध्र: ₹15,000/माह तक कुछ नहीं। तमिलनाडु व केरल में यह अर्ध-वार्षिक रूप से स्थानीय निकाय वसूलता है।

किन राज्यों में नहीं लगता?

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और कई पूर्वोत्तर राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स लगता ही नहीं। चूँकि यह राज्य का विषय है, अधिसूचना से नियम बदल सकते हैं। एक राहत: चुकाया गया प्रोफेशनल टैक्स धारा 16(iii) के तहत आपकी सैलरी से घट जाता है — लेकिन यह कटौती सिर्फ़ पुरानी टैक्स रिजीम में मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रोफेशनल टैक्स इनकम टैक्स से अलग कैसे है?

इनकम टैक्स केंद्र सरकार आपकी कुल आय पर लेती है; प्रोफेशनल टैक्स राज्य सरकार रोज़गार/पेशे पर लेती है और यह अधिकतम ₹2,500 सालाना ही होता है।

क्या फ्रीलांसर को भी भरना होता है?

हाँ — स्व-नियोजित पेशेवर और व्यापारी ख़ुद पंजीकरण कराकर सीधे भरते हैं, क्योंकि उनका कोई नियोक्ता नहीं होता जो काट सके।

महाराष्ट्र में फरवरी में ज़्यादा क्यों कटता है?

महाराष्ट्र ग्यारह महीने ₹200 और फरवरी में ₹300 लेता है, जिससे साल का कुल ठीक ₹2,500 की संवैधानिक सीमा पर पहुँच जाता है।

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यह सामान्य जानकारी है, पेशेवर सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपके तथ्यों पर निर्भर करते हैं — कार्रवाई से पहले किसी लाइसेंस प्राप्त CA या वकील से पुष्टि करें।