रेंट एग्रीमेंट कैसे बनाएं

किराए पर घर देते या लेते समय लिखित एग्रीमेंट ज़रूरी है — यह किराया, अवधि, जमा राशि और दोनों पक्षों के अधिकार तय करता है, और HRA क्लेम व एड्रेस प्रूफ़ के लिए भी काम आता है।

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11 महीने का एग्रीमेंट क्यों?

रजिस्ट्रेशन अधिनियम के तहत 12 महीने या उससे लंबी लीज़ का पंजीकरण अनिवार्य है, जिसमें ज़्यादा खर्च और औपचारिकता लगती है। इसलिए ज़्यादातर लोग 11 महीने का leave-and-licence एग्रीमेंट बनाते हैं। हालाँकि महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में 11 महीने का एग्रीमेंट भी पंजीकृत कराना ज़रूरी है।

स्टाम्प ड्यूटी कितनी लगती है?

किराया एग्रीमेंट पर स्टाम्प ड्यूटी फ्लैट की कीमत पर नहीं, किराए के मूल्य पर लगती है — इसलिए कम होती है। महाराष्ट्र में यह कुल किराए का 0.25% + वापसी-योग्य जमा का 10% होती है, साथ में लगभग ₹1,000 रजिस्ट्रेशन। दिल्ली में औसत सालाना किराए का लगभग 2%, कर्नाटक में ~0.5% (अक्सर 11 महीने के लिए ₹200 का स्टाम्प)। एग्रीमेंट में किराया, अवधि, जमा राशि, नोटिस अवधि और मरम्मत की ज़िम्मेदारी ज़रूर लिखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बिना रजिस्ट्रेशन वाला रेंट एग्रीमेंट मान्य है?

यह व्यवस्था का सबूत तो है, लेकिन अदालत में इसकी क़ीमत सीमित है और इसे एड्रेस प्रूफ़ या HRA दावे के लिए हमेशा नहीं माना जाता। पंजीकरण कराना ज़्यादा सुरक्षित है।

स्टाम्प ड्यूटी कौन भरता है — मकान मालिक या किरायेदार?

कानून इसे तय नहीं करता; आमतौर पर किरायेदार भरता है। जो भी तय हो, उसे एग्रीमेंट में लिख लें।

HRA क्लेम के लिए क्या ज़रूरी है?

किराया रसीदें रखें, और अगर सालाना किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा है तो मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य है।

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यह सामान्य जानकारी है, पेशेवर सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपके तथ्यों पर निर्भर करते हैं — कार्रवाई से पहले किसी लाइसेंस प्राप्त CA या वकील से पुष्टि करें।