TDS क्या होता है — दरें, सेक्शन और रिफंड
किस भुगतान पर कितना TDS?
हर तरह के भुगतान की अपनी धारा, दर और सीमा है। सैलरी पर धारा 192 के तहत स्लैब दर से कटता है। ठेकेदार को भुगतान पर 194C — व्यक्ति/HUF को 1%, अन्य को 2% (₹30,000 एकल या ₹1,00,000 सालाना से ऊपर)। प्रोफेशनल फीस पर 194J — 10% (तकनीकी सेवा पर 2%), ₹50,000 से ऊपर। किराए पर 194-I — भूमि/भवन 10%, मशीनरी 2%, ₹6,00,000 सालाना से ऊपर। कमीशन पर 194H — 2% (1 अक्टूबर 2024 से 5% घटाकर), ₹20,000 से ऊपर। लाभांश पर 194 — 10%, ₹10,000 से ऊपर।
TDS कैसे जाँचें और रिफंड कैसे लें?
incometax.gov.in पर फॉर्म 26AS और AIS में देखें कि आपके PAN पर कितना TDS जमा हुआ है। ITR भरते समय यह TDS आपकी कुल टैक्स देनदारी से घटता है — अगर कटा हुआ TDS आपकी असली देनदारी से ज़्यादा है, तो बाकी रकम रिफंड में वापस आती है। PAN न देने पर धारा 206AA के तहत 20% या उससे ज़्यादा दर से TDS कटता है, इसलिए PAN ज़रूर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
TDS कट गया लेकिन मेरी इनकम टैक्सेबल नहीं है, क्या करें?
अगर आपकी कुल आय टैक्स सीमा से कम है तो बैंक/भुगतानकर्ता को फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिक के लिए 15H) दें ताकि TDS न कटे। पहले ही कट चुका है तो ITR भरकर पूरा रिफंड ले सकते हैं।
TDS और इनकम टैक्स में क्या अंतर है?
TDS टैक्स वसूलने का एक तरीका है, अलग टैक्स नहीं। साल के अंत में आपकी असली देनदारी स्लैब से तय होती है; कटा हुआ TDS उसमें से घट जाता है और बाकी या तो आप भरते हैं या रिफंड मिलता है।
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यह सामान्य जानकारी है, पेशेवर सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपके तथ्यों पर निर्भर करते हैं — कार्रवाई से पहले किसी लाइसेंस प्राप्त CA या वकील से पुष्टि करें।