ITR कैसे भरें — स्टेप बाय स्टेप गाइड

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना आसान है अगर आपके पास सही जानकारी हो। यहाँ जानिए कौन-सा ITR फॉर्म आपके लिए सही है, पुरानी और नई टैक्स रिजीम में अंतर, और रिटर्न फाइल करने के स्टेप्स।

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किसे ITR भरना ज़रूरी है

सीधा नियम यह है कि अगर आपकी कुल आय मूल छूट सीमा से ऊपर है तो रिटर्न भरना अनिवार्य है — और यह आय कटौतियाँ घटाने से पहले वाली देखी जाती है, जो बहुत लोग उल्टा समझ लेते हैं। इसके अलावा कुछ हालात ऐसे हैं जहाँ आय कम होने पर भी रिटर्न भरना पड़ता है: विदेश में कोई संपत्ति या खाता हो, एक तय सीमा से ज़्यादा बिजली का बिल भरा हो, चालू खातों में बड़ी रक़म जमा की हो, या विदेश यात्रा पर बड़ा ख़र्च किया हो। कारोबार या पेशे की एक तय टर्नओवर सीमा पार करने पर भी यह ज़रूरी हो जाता है। और अनिवार्य न होने पर भी भरना अक्सर फ़ायदे का सौदा है — TDS कटा हो तो रिफंड पाने का यही एकमात्र रास्ता है, नुक़सान आगे ले जाना हो तो समय पर भरा रिटर्न चाहिए, और ऋण या वीज़ा में पिछले वर्षों का ITR माँगा जाता है।

कौन-सा ITR फॉर्म भरें?

फ़ॉर्म आपकी आय के प्रकार से तय होता है, रक़म से नहीं। ITR-1 यानी सहज उस निवासी व्यक्ति के लिए है जिसकी आय वेतन या पेंशन, एक मकान और ब्याज जैसे सामान्य स्रोतों से है और तय सीमा के भीतर है। पूँजीगत लाभ हो, एक से ज़्यादा मकान हों, या विदेशी आय या संपत्ति हो, तो ITR-2 पर जाना पड़ता है। कारोबार या पेशे की आय नियमित बहीखाते के साथ हो तो ITR-3, और धारा 44AD या 44ADA की अनुमानित योजना में हों तो ITR-4 यानी सुगम। ग़लत फ़ॉर्म चुनना छोटी बात नहीं है — जिस फ़ॉर्म में आपकी आय का प्रकार आता ही नहीं, उस पर भरा गया रिटर्न धारा 139(9) के तहत दोषपूर्ण घोषित हो सकता है, और समय पर सुधार न हो तो वह भरा हुआ ही नहीं माना जाता। संदेह हो तो व्यापक वाला फ़ॉर्म चुनना ज़्यादा सुरक्षित है।

पहले दस्तावेज़ जुटाएँ

तैयारी पहले कर लेने से रिटर्न आधे घंटे का काम रह जाता है। वेतन वालों के लिए Form 16, और उसके साथ 26AS तथा AIS — ये तीनों एक साथ रखिए, क्योंकि मिलान इन्हीं के बीच होना है। बैंक और डाकघर के ब्याज का विवरण, जो पासबुक या सालाना विवरण से मिल जाता है। पूँजीगत लाभ हो तो ब्रोकर या फंड हाउस का पूँजीगत लाभ विवरण, जो लगभग सभी अब डाउनलोड के लिए देते हैं। कटौतियों के प्रमाण — PPF की पासबुक, ELSS का विवरण, बीमा की रसीदें, बच्चों की फीस, गृह ऋण का ब्याज-मूलधन प्रमाणपत्र, किराए की रसीदें। किराए की आय हो तो किरायेदार का विवरण और नगरपालिका कर की रसीद। और अंत में PAN, आधार तथा वह बैंक खाता जो पोर्टल पर पूर्व-सत्यापित हो, क्योंकि रिफंड उसी में आएगा।

कौन-सी रिजीम चुनें — असली गणित

नई रिजीम अब डिफ़ॉल्ट है, इसलिए कुछ न चुनने का मतलब है उसी में रहना। उसमें ₹4 लाख तक शून्य, फिर ₹4 लाख के बैंड में बढ़ती दरें, सैलरी वालों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन, और धारा 87A की ₹60,000 तक की छूट जो ₹12 लाख तक की कर योग्य आय पर टैक्स शून्य कर देती है। पुरानी रिजीम में दरें ऊँची हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000, पर वहाँ 80C, 80D, HRA और गृह ऋण का ब्याज मिलता है। मोटे तौर पर पुरानी तभी जीतती है जब कुल कटौतियाँ काफ़ी बड़ी हों — व्यवहार में आम तौर पर तब, जब गृह ऋण चल रहा हो और आप किराए पर भी रहते हों। सही तरीक़ा एक ही है: दोनों की गणना अपने असली आँकड़ों पर कीजिए। नियोक्ता ने जिस रिजीम पर TDS काटा हो, रिटर्न में आप उससे अलग चुन सकते हैं।

फाइल करने के स्टेप्स

प्रक्रिया आयकर पोर्टल पर पूरी तरह ऑनलाइन है और क्रम से चलने पर सीधी है। PAN से लॉगिन कीजिए, निर्धारण वर्ष चुनिए और सही ITR फ़ॉर्म चुनिए। पोर्टल आपकी काफ़ी जानकारी पहले से भर देता है — वेतन, TDS, बैंक ब्याज और कुछ लेन-देन — पर यह पूर्व-भरी जानकारी अंतिम सत्य नहीं है, उसे अपने Form 16, 26AS और AIS से मिलाकर जाँचिए और जहाँ ज़रूरत हो सुधारिए। इसके बाद कटौतियाँ भरिए, रिजीम चुनिए और टैक्स की गणना देखिए। अगर कुछ बकाया निकले तो पहले चालान से भरिए और उसका विवरण रिटर्न में डालिए, तब जमा कीजिए। जमा करने के बाद तीस दिन के भीतर ई-वेरिफ़ाई करना अनिवार्य है, वरना पूरा रिटर्न अमान्य हो जाता है। पावती और भरी हुई प्रति डाउनलोड करके संभाल लीजिए।

e-verify किए बिना रिटर्न अधूरा है

यह वह क़दम है जिस पर सबसे ज़्यादा लोग चूकते हैं, और उसका नतीजा सबसे भारी होता है। बिना सत्यापन के भरा गया रिटर्न क़ानूनन ऐसा माना जाता है जैसे भरा ही न गया हो — यानी देरी की फीस, ब्याज और नुक़सान आगे न ले जा पाने के सारे नतीजे वैसे ही लागू होंगे, भले ही आपने तारीख़ से पहले भर दिया हो। सत्यापन के लिए रिटर्न भरने की तारीख़ से तीस दिन मिलते हैं। सबसे आसान रास्ता आधार से जुड़े मोबाइल पर आने वाला OTP है, जो मिनटों का काम है; इसके अलावा नेट बैंकिंग, डीमैट खाते या बैंक खाते से भी हो जाता है। आख़िरी विकल्प के रूप में हस्ताक्षरित ITR-V डाक से भेजा जा सकता है, पर उसमें समय लगता है। सत्यापन के बाद ही प्रोसेसिंग शुरू होती है और रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

तारीख निकल गई तो?

नियत तारीख़ चूक जाने का मतलब यह नहीं कि अब कुछ नहीं हो सकता — बस विकल्प महँगे होते जाते हैं। पहला रास्ता बिलेटेड रिटर्न है, जो आम तौर पर उसी निर्धारण वर्ष की 31 दिसंबर तक भरा जा सकता है; इसमें धारा 234F की फीस लगेगी, जो कुल आय ₹5 लाख से ज़्यादा होने पर ₹5,000 और उससे कम होने पर ₹1,000 है, साथ ही बकाया टैक्स पर 234A का ब्याज। सबसे बड़ी क़ीमत यह है कि पूँजीगत और कारोबारी नुक़सान आगे ले जाने का अधिकार चला जाता है। वह तारीख़ भी निकल जाए तो धारा 139(8A) का अद्यतन रिटर्न बचता है, जिसकी खिड़की काफ़ी लंबी है — पर उसमें रिफंड का दावा नहीं हो सकता और अतिरिक्त कर देना पड़ता है, जो देर के साथ बढ़ता जाता है। इसलिए जितनी जल्दी भरें, उतना सस्ता।

वे गलतियाँ जो नोटिस बुलाती हैं

ज़्यादातर नोटिस किसी बड़ी गड़बड़ी से नहीं, गिनी-चुनी आम चूकों से आते हैं। सबसे पहली — AIS न देखना, जिससे बचत खाते का ब्याज, लाभांश या म्यूचुअल फंड की बिक्री छूट जाती है, जबकि विभाग के पास वह जानकारी पहले से होती है। दूसरी — TDS का दावा Form 16 के आधार पर करना जबकि 26AS में आँकड़ा अलग है; दावा हमेशा 26AS से मिलाइए। तीसरी — नौकरी बदलने वाले साल में दोनों नियोक्ताओं की सैलरी न जोड़ना, जिससे कटौती दो बार गिन ली जाती है। चौथी — ग़लत ITR फ़ॉर्म चुनना, जिससे रिटर्न धारा 139(9) में दोषपूर्ण हो सकता है। पाँचवीं — ऐसी कटौती का दावा जिसका प्रमाण आपके पास नहीं है। और छठी — ई-वेरिफ़ाई करना भूल जाना, जिसके बाद रिटर्न भरा हुआ माना ही नहीं जाता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आय कम होने पर भी ITR भरना चाहिए?

अगर TDS कटा है तो हाँ — रिफंड पाने का यही एकमात्र तरीका है। इसके अलावा वीज़ा, होम लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए पिछले साल के रिटर्न माँगे जाते हैं, इसलिए शून्य टैक्स होने पर भी रिटर्न भरना उपयोगी रहता है।

e-verify करना कितना ज़रूरी है?

पूरी तरह ज़रूरी। 30 दिन में e-verify न हुआ रिटर्न कानूनन भरा हुआ नहीं माना जाता, चाहे आपने टैक्स और लेट फीस चुका दी हो। आधार OTP से यह दो मिनट में हो जाता है।

रिफंड कितने दिन में आता है?

साफ़-सुथरे रिटर्न आमतौर पर e-verify होने के 7 से 15 दिन में प्रोसेस हो जाते हैं। बैंक खाता प्री-वैलिडेट न हो, PAN-आधार लिंक न हो, या AIS से मेल न खाए तो 90 दिन या उससे ज़्यादा भी लग सकते हैं।

ITR भरने की आखिरी तारीख क्या है?

ज़्यादातर लोगों के लिए AY 2026-27 की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। देरी से भरने पर 234F के तहत ₹5,000 (₹5 लाख से कम इनकम पर ₹1,000) लेट फीस और 234A ब्याज लगता है।

कौन-सा टैक्स रिजीम बेहतर है?

नई रिजीम में ₹12 लाख तक इनकम पर टैक्स ज़ीरो है। पुरानी रिजीम तभी बेहतर है जब आपकी कटौतियाँ (80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज) बड़ी हों। दोनों की गणना करके चुनें।

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यह सामान्य जानकारी है, पेशेवर सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपके तथ्यों पर निर्भर करते हैं — कार्रवाई से पहले किसी लाइसेंस प्राप्त CA या वकील से पुष्टि करें।